उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पहले छोटे भाई प्रतीक यादव को खोने का दुख, और अब बड़ी बेटी अदिति यादव (23 वर्ष) को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की साजिश ने परिवार को झकझोर दिया है।
📌 फर्जी पोस्ट का मामला
9 जून 2026 को सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक और फर्जी पोस्ट वायरल हुआ। इसमें दावा किया गया कि अदिति यादव ने घर से 7 करोड़ रुपये चुराए और अपने मुस्लिम दोस्त के साथ भाग गईं। पोस्ट में एक एडिटेड फोटो भी जोड़ी गई थी। यह दावा पूरी तरह गलत था।
👮 पुलिस कार्रवाई
- 11 जून 2026 को कानपुर साइबर क्राइम थाने में FIR दर्ज हुई।
- मुख्य आरोपी नागेश्वर सिंह बघेल को मध्य प्रदेश के रीवा से गिरफ्तार किया गया।
- कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, लेकिन जांच जारी है।
- अन्य आरोपी:
- भारत कुमार पटेल (अमेरिका के पेंसिल्वेनिया से अकाउंट संचालित)
- विनोद कुमार (जौनपुर, उत्तर प्रदेश – ऑटो चालक)
⚖️ कानूनी धाराएं
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 (मानहानि), धारा 336(4), और आईटी एक्ट की धारा 66E (निजता का उल्लंघन) के तहत मामला दर्ज किया है।
📅 केस टाइमलाइन
- 7 जून 2026: अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावे में घोटाले का आरोप लगाया।
- 9 जून 2026: अदिति यादव के खिलाफ फर्जी पोस्ट वायरल।
- 11 जून 2026: FIR दर्ज।
- मध्य जून 2026: नागेश्वर सिंह बघेल की गिरफ्तारी।
- कोर्ट पेशी: आरोपी को जमानत मिली, केस जारी।
🔍 क्यों वायरल हुआ फर्जी दावा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोस्ट राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा था। इसमें सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, जबकि अदिति यादव के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह झूठे थे।
🗣️ अखिलेश यादव परिवार की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव ने इस घटना की निंदा की और कहा कि विपक्षी राजनीति अब व्यक्तिगत स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सख्त कार्रवाई की मांग की।
🚨 पुलिस की चुनौती
कानपुर साइबर पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन विदेश से संचालित अकाउंट और अन्य आरोपियों को पकड़ना अभी बाकी है। इंटरपोल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ समन्वय जरूरी है।